वाटर वूमन सावित्री श्रीवास्तव के नेतृत्व में बावड़ी संरक्षण अभियान, जल विरासत बचाने का लिया संकल्प

ग्वालियर। जल संरक्षण और प्राचीन जल स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में वाटर वूमन सावित्री श्रीवास्तव के नेतृत्व में बावड़ी की सफाई और संरक्षण अभियान चलाया गया। इस दौरान जल विरासत को बचाने और प्राचीन जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प लिया गया।

सावित्री श्रीवास्तव ने कहा कि बावड़ियां केवल पत्थरों से बनी पुरानी संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि हमारी जल संस्कृति, इतिहास और पारंपरिक जल प्रबंधन की अमूल्य धरोहर हैं। हमारे पूर्वजों ने वर्षा जल के संरक्षण और भू-जल स्तर को बनाए रखने के लिए कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया था, जिन्हें आज संरक्षित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इन ऐतिहासिक जल स्रोतों को कचरे, अतिक्रमण और प्रदूषण से बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि वर्षा जल को इन बावड़ियों से जोड़ा जाए और नियमित रूप से उनकी सफाई की जाए, तो यह जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

सावित्री श्रीवास्तव ने कहा कि बावड़ियां बचेंगी तो हमारी जल विरासत भी सुरक्षित रहेगी और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी संरक्षित होगा। ग्वालियर को तानसेन की नगरी कहा जाता है, लेकिन यहां लगभग 3 हजार कुएं और बावड़ियां मौजूद हैं। ऐसे में ग्वालियर को बावड़ियों का शहर कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी।

अभियान के दौरान बताया गया कि सावित्री श्रीवास्तव के नेतृत्व में अब तक 18 कुओं और बावड़ियों को पुनर्जीवित किया जा चुका है। वर्तमान में जिस बावड़ी की सफाई और संरक्षण का कार्य किया जा रहा है, वह इस अभियान की 19वीं बावड़ी है। इसे भी जल्द स्वच्छ और उपयोग योग्य बनाकर प्राचीन जल स्रोतों की रक्षा के संकल्प को पूरा किया जाएगा।

अभियान में शामिल लोगों ने नागरिकों से भी जल संरक्षण और ऐतिहासिक जल संरचनाओं को बचाने के लिए आगे आने की अपील की। इस अवसर पर साफ-सफाई के साथ पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

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