By: Ravindra Singh
Indore : मध्य प्रदेश के इंदौर में फर्जी डी.एड और बी.एड डिग्री व अंकसूचियों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 51 शिक्षकों पर एक बार फिर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि ये शिक्षक करीब दो दशक से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कुछ शिक्षकों को नौकरी के दौरान पदोन्नति भी मिल चुकी है।
विभाग अब इन शिक्षकों को नौकरी के दौरान दिए गए वेतन का पूरा हिसाब जुटा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक शिक्षक को वर्तमान में करीब 50 हजार से 1 लाख रुपये तक मासिक वेतन मिल रहा है। लंबे समय तक भुगतान किए गए वेतन की गणना के बाद सरकार द्वारा बड़ी रकम की वसूली की जा सकती है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, यह राशि करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
2006-07 की भर्ती से जुड़ा है मामला
Indore यह पूरा मामला सांवेर क्षेत्र में वर्ष 2006-07 के दौरान हुई संविदा शाला शिक्षक भर्ती से संबंधित है। इसी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर इन शिक्षकों ने सरकारी स्कूलों में नौकरी हासिल की थी।
जांच के दौरान 51 शिक्षकों की डी.एड और बी.एड की डिग्री तथा अंकसूचियों को फर्जी पाया गया है। इसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
23 अन्य शिक्षकों की भी जांच जारी
Indore जांच के दायरे में सिर्फ 51 शिक्षक ही नहीं हैं। करीब 23 अन्य शिक्षकों के दस्तावेज भी संदेह के घेरे में बताए जा रहे हैं। इन मामलों में जांच अभी जारी है और दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि की जा रही है।
इस तरह कुल 74 शिक्षकों से संबंधित रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के सामने है। लोकायुक्त ने भी इन सभी शिक्षकों से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे हैं।
वेतन और पदोन्नति की भी होगी जांच
Indore फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोपों के साथ-साथ इन शिक्षकों को अब तक मिले वेतन और नौकरी के दौरान मिली पदोन्नतियों की भी जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि प्रत्येक शिक्षक ने कितने वर्षों तक सेवा की और इस अवधि में उसे सरकार से कुल कितना वेतन मिला।
वेतन की अंतिम गणना पूरी होने के बाद वसूली की वास्तविक राशि स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल अधिकारियों ने इसके करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया है।
लोकायुक्त ने मांगा रिकॉर्ड
Indore मामले में लोकायुक्त की जांच भी महत्वपूर्ण है। लोकायुक्त ने 74 शिक्षकों से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। अब संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद जांच आगे बढ़ेगी। फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति की पुष्टि होने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।