इंदौर। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र कुमार की कार्यशैली और कथित अनुचित व्यवहार को लेकर इंदौर के वकीलों में नाराजगी सामने आई है। विरोध में जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संघों के बैनर तले वकीलों ने कुटुंब न्यायालय परिसर में प्रदर्शन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। अधिवक्ताओं ने न्यायाधीश के व्यवहार में सुधार की मांग करते हुए आगे आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी।
लगातार शिकायतें मिलने का अधिवक्ता संघ का दावा
इंदौर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राकेश पाल के अनुसार, नई कार्यकारिणी के चुनाव के बाद से ही कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के व्यवहार को लेकर वकीलों और पक्षकारों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि न्यायाधीश का बातचीत करने का लहजा और आचरण उचित नहीं है। इस संबंध में पूर्व में भी उच्च न्यायालय में दो बार लिखित शिकायतें दिए जाने की बात कही गई है।
प्रशासनिक न्यायाधीश के सामने रखी अपनी बात
सोमवार को जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय, इंदौर के दोनों अधिवक्ता संघों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक न्यायाधीश से मुलाकात कर अपनी शिकायतें और चिंताएं सामने रखीं। वकीलों ने कहा कि न्यायपालिका में बार और बेंच दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके अनुसार, वकीलों और पक्षकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना आवश्यक है, ताकि आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।
व्यवहार में सुधार के लिए अंतिम चेतावनी
जिला कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाल और सचिव धर्मेंद्र गुर्जर ने कहा कि संबंधित न्यायाधीश को अपने व्यवहार में सुधार लाने के लिए अंतिम अवसर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं आया, तो अधिवक्ता संघ कार्य बहिष्कार सहित आंदोलन के अन्य विकल्पों पर विचार करेगा। जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल या न्यायालयीन कार्य से विरत रहने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
आश्वासन के बाद आगे की रणनीति पर होगी चर्चा
अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में न्यायाधीश की ओर से भविष्य में अपने व्यवहार पर ध्यान देने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, आगे की रणनीति दोनों बार एसोसिएशन के सदस्यों के साथ बैठक में तय की जाएगी। फिलहाल, मामले में अधिवक्ताओं के आरोपों और न्यायाधीश की ओर से दिए गए आश्वासन के बीच आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
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