By: Ravindra Singh
एमसीबी। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। एक महिला ने अस्पताल के स्टाफ पर आरोप लगाया है कि सामान्य प्रसव कराने की कोशिश के दौरान उसकी नवजात बच्ची को गंभीर चोटें आईं। परिजनों के मुताबिक, बच्ची के दोनों पैरों, कूल्हे और हाथ की हड्डियों में फ्रैक्चर पाए गए। उसे बेहतर इलाज के लिए अंबिकापुर ले जाया गया, लेकिन जन्म के 24 दिन बाद उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए टीम गठित करने की बात कही है।
प्रसव के तरीके को लेकर मां ने उठाए सवाल
यह मामला ग्राम पंचायत लालपुर के स्कूलपारा निवासी उपासना से जुड़ा है। वह 10 सितंबर को प्रसव के लिए मनेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल पहुंची थीं। महिला के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान उन्होंने पांच बार सोनोग्राफी कराई थी। उनका दावा है कि जांच में बच्चा स्वस्थ बताया गया था, लेकिन गर्भ में उसकी स्थिति सामान्य नहीं होने के कारण ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती थी।
उपासना का आरोप है कि इसके बावजूद अस्पताल में सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया गया और इस दौरान उनके साथ जबरदस्ती की गई। उनका मानना है कि इसी प्रक्रिया के दौरान बच्ची को चोटें आईं। हालांकि, प्रसव के समय की परिस्थितियों और चोटों के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
एक्स-रे में फ्रैक्चर मिलने का परिजनों का दावा
बच्ची के जन्म के बाद उसकी शारीरिक स्थिति को लेकर परिवार चिंतित हो गया। इसके बाद उपासना और उनके पति शिवकुमार उसे इलाज के लिए अंबिकापुर लेकर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक, वहां कराए गए एक्स-रे में बच्ची की दोनों जांघों, कूल्हे और हाथ की हड्डियों में फ्रैक्चर सामने आए।
परिवार का आरोप है कि प्रसव के दौरान आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई। बच्ची का इलाज कराया गया, लेकिन जन्म के 24 दिन बाद उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार ने प्रसव के दौरान अपनाई गई चिकित्सा प्रक्रिया और अस्पताल के कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल
महिला ने अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ थाने में भी शिकायत देने की बात कही है। परिजन चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह पता लगाया जाए कि नवजात को कई जगह फ्रैक्चर कैसे हुए। साथ ही, प्रसव के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी समीक्षा की जाए।
मामले में मेडिकल रिकॉर्ड, सोनोग्राफी रिपोर्ट और एक्स-रे की जांच अहम मानी जा रही है। जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची को चोटें किन परिस्थितियों में आईं और क्या किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी।
जांच टीम गठित, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन
जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के अनुसार, मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई डॉक्टर दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब पीड़ित परिवार को जांच पूरी होने और जिम्मेदारी तय किए जाने का इंतजार है। मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई से ही घटना की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।
Also Read: मध्य प्रदेश में मौसम का यू-टर्न: 15 से 18 अक्टूबर तक आंधी और बारिश का अलर्ट, जानें जिलों का हाल