हिमाचल प्रदेश में मनरेगा से नई वीबी-जी राम जी योजना में बदलाव के बीच 1023 ग्राम रोजगार सेवकों का मार्च से जून 2026 तक का चार माह का मानदेय लंबित है। केंद्र से प्रशासनिक मद की राशि जारी नहीं होने के कारण भुगतान अटका हुआ है। इससे ग्राम रोजगार सेवकों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और पंचायतों में कामकाज प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
20.50 करोड़ रुपये की राशि अभी तक जारी नहीं
हिमाचल प्रदेश की 3758 पंचायतों में मनरेगा के कामकाज को गति देने वाले 1023 ग्राम रोजगार सेवकों का चार महीने का मानदेय लंबित है। मनरेगा व्यवस्था समाप्त होने और पहली जुलाई 2026 से नई वीबी-जी राम जी योजना शुरू होने के बीच मार्च से जून तक का भुगतान नहीं हो सका।
30 जून तक केंद्र से प्रशासनिक मद के 20.50 करोड़ रुपये बकाया थे। इस राशि में ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय के साथ प्रशासनिक मद से होने वाले अन्य खर्च भी शामिल हैं। प्रदेश सरकार की ओर से भी अपने फंड से यह भुगतान नहीं किया गया है।
जुलाई से नई योजना में मिल रहा मानदेय
पहली जुलाई 2026 से ग्राम रोजगार सेवकों को वीबी-जी राम जी योजना में शामिल किया गया है। नई व्यवस्था के तहत उन्हें 50 हजार रुपये मासिक मानदेय पर नए सिरे से नियुक्त किया गया है। ये कर्मचारी वर्ष 2008 से सेवाएं दे रहे हैं।
नई व्यवस्था लागू होने के साथ वर्तमान और पूर्व सरकारों की ओर से वित्तीय लाभों से संबंधित जारी अधिसूचनाएं निरस्त कर दी गई हैं। जुलाई से नई योजना के तहत ग्राम रोजगार सेवकों को मानदेय मिल रहा है, लेकिन मार्च से जून तक का पुराना भुगतान अभी लंबित है।
केंद्र को 12 बार पत्र, राशि जारी होने का इंतजार
मनरेगा के तहत ग्राम रोजगार सेवकों का वेतन 100 प्रतिशत केंद्र सरकार की ओर से प्रशासनिक मद से वहन किया जाता था। केंद्र सामान्य तौर पर प्रशासनिक मद की राशि चार किस्तों में जारी करता है। विभाग के अनुसार बकाया राशि जारी कराने के लिए केंद्र सरकार को 12 बार पत्राचार किया जा चुका है।
विभाग ने केंद्र के समक्ष मामला उठाया है और जल्द राशि जारी होने की उम्मीद जताई है। हालांकि, 20.50 करोड़ रुपये की राशि जारी नहीं होने के कारण चार महीने का मानदेय अभी तक ग्राम रोजगार सेवकों को नहीं मिल पाया है।