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भिंड में कृषि बलराम महोत्सव के नाम पर 20 लाख का खेल? एक ही तारीख में दो भुगतान आदेश, अनफिट बसों से किसानों की जान जोखिम में


मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया और 5 सितंबर को प्रदेशभर में कृषि बलराम महोत्सव का आयोजन किया गया। भिंड जिले में भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए किसानों को संबोधित किया।

आयोजन के लिए भिंड जिले को मंडी बोर्ड निधि से 20 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी। इस राशि का इस्तेमाल किसानों को ब्लॉक स्तर से कार्यक्रम स्थल तक लाने-ले जाने और भोजन जैसी व्यवस्थाओं के लिए किया जाना था। लेकिन अब इसी राशि के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बसों के भुगतान से लेकर भोजन व्यवस्था तक में अनियमितताएं हुई हैं। मामले में जिला पंचायत और परिवहन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

एक ही तारीख पर दो भुगतान आदेश, 30 बस या 50 बस?

भिंड जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वीर सिंह चौहान की ओर से 3 सितंबर 2026 को एक ही आवक क्रमांक 4874 के आधार पर दो अलग-अलग भुगतान आदेश जारी किए जाने का दावा किया जा रहा है।

पहले आदेश में 30 बसों के अधिग्रहण के लिए 2 लाख 88 हजार रुपये का अग्रिम भुगतान स्वीकृत बताया गया है। वहीं, दूसरे आदेश में 50 बसों के लिए 4 लाख 80 हजार रुपये का अग्रिम भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। दोनों भुगतान एक ही व्यक्ति अरविंद सिंह के खाते में किए जाने का दावा है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आयोजन के लिए वास्तव में कितनी बसों का अधिग्रहण किया गया था—30 या 50? एक ही आवक क्रमांक से दो भुगतान आदेश जारी होने की स्थिति में दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की जांच जरूरी हो जाती है।

अनफिट बसों से किसानों का सफर, हादसा होता तो जिम्मेदार कौन?

आयोजन में किसानों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल की गई बसों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि बड़ी संख्या में इस्तेमाल की गई बसों के पास वैध परमिट, टैक्स और फिटनेस से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। कुछ बसों के दूसरे राज्यों के परमिट होने की बात भी सामने आई है।

अगर बिना वैध दस्तावेज या फिटनेस वाली बसों में किसानों को सफर कराया गया, तो यह उनकी सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। ऐसे में सवाल उठता है कि बसों की जांच किस स्तर पर की गई और उन्हें सड़क पर चलने की अनुमति किस आधार पर मिली?

यदि यात्रा के दौरान कोई दुर्घटना होती तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होती? इस पूरे मामले में परिवहन विभाग की भूमिका और बसों की फिटनेस जांच भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।

2000 से ज्यादा फूड पैकेट का दावा, कार्यक्रम में पहुंचे करीब 800 किसान

कृषि बलराम महोत्सव की भोजन व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से दावा है कि कार्यक्रम के लिए 2000 से ज्यादा फूड पैकेट का ऑर्डर दिया गया था, जबकि कार्यक्रम स्थल पर करीब 800 किसानों के पहुंचने की बात सामने आई है।

ऐसे में सवाल है कि भोजन के पैकेट की वास्तविक संख्या कितनी थी, ऑर्डर किस फर्म को दिया गया और भुगतान किस आधार पर किया जाना था? इन सभी बिंदुओं से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ हो सकती है।

मामले में जिला पंचायत सीईओ वीर सिंह चौहान से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। हालांकि, उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया। अब पूरे मामले में दस्तावेजी जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 20 लाख रुपये की राशि के इस्तेमाल में वास्तव में कोई अनियमितता हुई या नहीं।

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