by Anuradha
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जल संसाधन विभाग के कार्यकारी अभियंता (EE) को मीडिया के सामने बेबाक बयान देना भारी पड़ गया। लोकायुक्त की छापेमारी के बाद दिए गए एक विवादित बयान में ईई ने यह स्वीकार किया था कि वे अपनी मर्जी से मिलने वाले पैसे रख लेते थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
पन्ना लोकायुक्त कार्रवाई: 45 हजार की रिश्वत लेते दो कर्मचारी गिरफ्तार
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब 28 अक्टूबर को सागर लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। पन्ना जल संसाधन विभाग के अंतर्गत ‘मझगवां मध्यम परियोजना’ के नहर निर्माण कार्य का अंतिम बिल पास करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी।
शिकायतकर्ता ठेकेदार का कहना था कि उसके बिल का भुगतान महीनों से रोका गया था। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाकर संभागीय लेखाकार (डिविजनल अकाउंटेंट) दीपक परिहार से 15,000 रुपये और क्लर्क अरविंद पाठक से 30,000 रुपये—यानी कुल 45,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा।
वायरल बयान: “हम मांगते नहीं, पर कोई खुशी से दे तो रख लेते हैं”
इस लोकायुक्त कार्रवाई के तुरंत बाद जब पत्रकारों ने जल संसाधन विभाग के कार्यकारी अभियंता (EE) सी.बी. अहिरवार से इस पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कैमरे पर एक ऐसा बयान दे दिया जो इंटरनेट पर आग की तरह फैल गया।
वायरल वीडियो में ईई साहब यह कहते नजर आए कि उन्होंने कभी कोई ‘कमीशन’ या तय प्रतिशत की मांग नहीं की, लेकिन अगर कोई अपनी खुशी से पैसे देता है तो वे उसे ले लेते हैं। हालांकि लोकायुक्त की इस रेड में सीधे तौर पर उनका नाम नहीं आया था, लेकिन उनके इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने भ्रष्टाचार को सामान्य ठहराने का काम किया, जिससे जनता और शासन में भारी आक्रोश फैल गया।
शासन की सख्त कार्रवाई: आचरण नियमों के उल्लंघन पर निलंबन
मामले की गंभीरता को भांपते हुए राज्य सरकार ने बिना देर किए ईई सी.बी. अहिरवार को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय भोपाल कार्यालय नियत किया गया है।
सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि एक जिम्मेदार पद पर आसीन अधिकारी द्वारा इस तरह का सार्वजनिक बयान देना ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965’ का स्पष्ट उल्लंघन, गंभीर अनुशासनहीनता और कदाचार है। इसे सरकारी पद की गरिमा के विरुद्ध और विभाग की छवि धूमिल करने वाला माना गया है।
भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क की गहराई से जांच जारी
इस पूरी घटना ने पन्ना जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भले ही लोकायुक्त की प्रारंभिक कार्रवाई में दो कनिष्ठ कर्मचारी पकड़े गए हों, लेकिन ईई के इस निलंबन ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क में ऊपरी स्तर पर भी जवाबदेही तय की जा रही है। फिलहाल लोकायुक्त और विभागीय टीमें मामले के अन्य पहलुओं और इसमें शामिल अन्य चेहरों की तलाश में जुटी हुई हैं।

