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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान, बोले- छांगुर बाबा के बजाय बजरंग बाबा पर रखें आस्था

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों मध्य प्रदेश में सागर से टीकमगढ़ तक निकाली जा रही यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। यात्रा के चौथे दिन उन्होंने हिंदू एकता, नशामुक्ति और बेटियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हिंदू छांगुर बाबा जैसे लोगों के चक्कर में न फंसें, बल्कि बजरंग बाबा के चक्कर में फंसें। शास्त्री के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य राम के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना और समाज में जागरूकता बढ़ाना है।

‘पहले घर संभालेंगे, फिर देश संभालेंगे’

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि यात्रा के शुरुआती तीन दिनों में करीब 300 किलोमीटर का सफर पूरा हुआ। उन्होंने इस यात्रा को ‘राम-नैतिक यात्रा’ बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य राजनीति करना नहीं, बल्कि हिंदू एकता, नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि पहले अपने घर और परिवार को संभालना जरूरी है, इसके बाद पूरे देश की चिंता की जा सकती है। शास्त्री ने मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में अंतरधार्मिक संबंधों से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए बेटियों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने श्रद्धा हत्याकांड जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि सनातन धर्म की बेटियां किसी भी तरह के जाल में न फंसें।

गरबा पंडालों के बाहर गोमूत्र रखने का दिया सुझाव

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गरबा पंडालों में प्रवेश करने वालों की पहचान को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि पंडालों के बाहर गोमूत्र रखने, उसके छिड़काव और चरणामृत देने जैसी व्यवस्था की जा सकती है। उन्होंने वराह भगवान की पूजा का भी उल्लेख किया।

शास्त्री ने कहा कि उनका उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और विचारों का प्रचार करना है। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति के पक्ष में बोलना किसी दूसरे धर्म के खिलाफ बोलने के समान नहीं है।

‘जन-जागरूकता ही बदलाव का सबसे बड़ा उपाय’

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए जन-जागरूकता सबसे बड़ा उपाय है। उन्होंने सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि पूजा, धर्म, व्यवस्था और आचरण के मामलों में केवल कल्पनाओं के बजाय व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

जेन-जी को लेकर भी रखी अपनी बात

युवाओं के मुद्दे पर शास्त्री ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन विरोध ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे दंगा भड़के या देश का माहौल खराब हो। उन्होंने जेन-जी पर भरोसा जताते हुए कहा कि आने वाले समय में युवा देश की गति और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान यात्रा के दौरान उठाए गए धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को सामने लाते हैं। उनके सुझावों और विचारों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

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