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ग्वालियर-चंबल में खाद्य सुरक्षा पर सवाल: 2,190 किलो मावा, 4,526 किलो मिल्क केक और 706 लीटर घी जब्त

Gwalior

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By: Ravindra Singh

ग्वालियर-चंबल अंचल में मावा, पेड़े और पारंपरिक मिठाइयों की मांग हमेशा से रही है, लेकिन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर सामने आ रही शिकायतें चिंता बढ़ा रही हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने 1 अगस्त से 20 अक्टूबर 2026 के बीच अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में मावा, मिल्क केक, पनीर और घी जब्त किया। इस दौरान होटल, डेयरी, रेलवे की पेंट्रीकार और स्कूली बच्चों के मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाली रसोइयों का भी निरीक्षण किया गया। इन कार्रवाइयों ने खाद्य सामग्री के भंडारण, साफ-सफाई और नियमित निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

मावा, मिल्क केक और घी की बड़ी खेप जब्त

खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, निर्धारित अवधि में ग्वालियर में 2,190 किलोग्राम मावा, 24 किलोग्राम पनीर, 4,526 किलोग्राम मिल्क केक और 706 लीटर घी जब्त किया गया। 8 अगस्त को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित श्री राधिका एजेंसी से 706 लीटर गोवर्धन प्योर गाय घी का स्टॉक जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 4.62 लाख रुपये बताई गई। इसके नमूने जांच के लिए भेजे गए। वहीं, 10 अगस्त को मोर बाजार में भिंड से लाई गई मावे की खेप की जांच के दौरान करीब 2,190 किलोग्राम मावा जब्त किया गया। इसकी अनुमानित कीमत 7.04 लाख रुपये बताई गई। इसी दिन गोपाल डेयरी से 24 किलोग्राम पनीर भी जब्त किया गया। 25 अगस्त को पुरानी छावनी क्षेत्र में 4,526 किलोग्राम मिल्क केक की खेप पकड़ी गई, जिसकी अनुमानित कीमत 7.24 लाख रुपये से अधिक बताई गई। 19 अक्टूबर को मुरैना से आए एक वाहन की जांच में करीब 680 किलोग्राम मावा मिला, जिसके नमूने लिए गए। हालांकि, किसी खाद्य पदार्थ को मिलावटी घोषित करने के लिए प्रयोगशाला की अंतिम जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर हुई कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

होटल, डेयरी और रेलवे पेंट्रीकार में भी मिलीं अनियमितताएं

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई केवल मिठाइयों और डेयरी उत्पादों तक सीमित नहीं रही। 7 सितंबर को डबरा के दो ढाबों और आनंदम रेस्टोरेंट से पनीर सहित अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए। 8 सितंबर को ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पंजाब मेल की पेंट्रीकार से 200 से अधिक पानी की बोतलें जब्त की गईं। विभाग के अनुसार, इन बोतलों पर निर्माता से जुड़ी जरूरी जानकारी और निर्धारित लेबलिंग नहीं थी। 10 सितंबर को श्रीराम कॉलोनी स्थित द प्रभा इंटरनेशनल होटल की रसोई के निरीक्षण में शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थ एक ही फ्रीजर में रखे मिले। साफ-सफाई और भंडारण की व्यवस्था में भी कमियां पाई गईं। होटल का खाद्य लाइसेंस समाप्त होने के कारण रसोई को आगामी आदेश तक सील कर दिया गया। सितंबर में शहर की विभिन्न डेयरियों की भी जांच की गई। वहीं, 13 अक्टूबर को मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाली दो केंद्रीकृत रसोइयों के निरीक्षण में खाद्य सामग्री के भंडारण और स्वच्छता से जुड़ी कमियां सामने आईं। एक रसोई में चावल फर्श पर फैले हुए और गंदगी से प्रभावित मिले, जबकि दूसरी रसोई से तैयार भोजन और अन्य खाद्य सामग्री के नमूने लिए गए।

जांच रिपोर्ट, जुर्माने और नियमित निगरानी पर जोर

लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के साथ जांच रिपोर्ट और कानूनी कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करना भी जरूरी माना जा रहा है। 15 सितंबर को विभिन्न डेयरियों में रैपिड मिल्क टेस्ट किट से प्राथमिक जांच की गई। कुछ नमूनों में फैट और एसएनएफ की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर उन्हें प्रयोगशाला भेजा गया। 19 अक्टूबर को मुरैना से आए मावे के नमूने लेने के साथ शीतला माता मंदिर परिसर में प्रसाद की दुकानों का निरीक्षण भी किया गया। दुकानदारों को पेड़ा, बर्फी और मिल्क केक जैसी सामग्री लंबे समय तक रखकर इस्तेमाल न करने की हिदायत दी गई। खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में जुर्माना लगाने के साथ उसकी वसूली और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आना भी जरूरी है। उपलब्ध आंकड़ों में प्रदेश में 20.67 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाए जाने के मुकाबले 6.74 करोड़ रुपये की वसूली का उल्लेख है, हालांकि इसकी संबंधित अवधि और आधिकारिक अभिलेखों से पुष्टि आवश्यक है। ग्वालियर-चंबल में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, संदिग्ध खेपों की निगरानी, समय पर प्रयोगशाला रिपोर्ट और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। त्योहारों के दौरान विशेष अभियान चलाने के साथ पूरे साल निगरानी का मजबूत तंत्र ही उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

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