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ग्वालियर में बिना मान्यता चल रहे मदरसे पर छापा, 42 दर्ज बच्चों में मिले सिर्फ 18; बाल आयोग ने शुरू की जांच

Gwalior

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By: Ravindra Singh

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और देखरेख से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर एक मदरसा जांच के दायरे में आ गया है। झांसी रोड स्थित एजी ऑफिस पुल के पास संचालित दारुल कुरान मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया। इस दौरान शौचालयों के टूटे दरवाजे, रसोई में साफ-सफाई की कमी और खुले में रखा भोजन जैसी समस्याएं सामने आने की बात कही गई है। वहीं, रजिस्टर में दर्ज बच्चों की संख्या और मौके पर मौजूद बच्चों की संख्या में भी अंतर पाया गया। निरीक्षण के बाद बच्चों के संरक्षण और शिकायतों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, मदरसा प्रबंधन ने निरीक्षण के दौरान बच्चों की कम मौजूदगी के पीछे छुट्टी और बच्चों के घर जाने की वजह बताई है।

रजिस्टर में 42 बच्चे दर्ज, निरीक्षण में मिले 18; बालिकाओं की संख्या में भी अंतर

मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा के अनुसार, मदरसे के रिकॉर्ड में 42 बच्चों के नाम दर्ज थे, लेकिन निरीक्षण के समय परिसर में केवल 18 बच्चे मौजूद मिले। इसी तरह, रजिस्टर में 15 बालिकाएं दर्ज थीं, जबकि मौके पर आठ बालिकाएं ही मिलीं। इस अंतर को लेकर अधिकारियों ने संबंधित रिकॉर्ड की जांच की।

निरीक्षण के दौरान बालिकाओं के रहने, पढ़ाई और सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे। आयोग अध्यक्ष के मुताबिक, बालिकाओं को पढ़ाने के लिए एक महिला शिक्षिका प्रतिदिन करीब दो घंटे आती हैं। परिसर में उनके रहने की व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की स्थिति भी जांच के दायरे में है।

टीम को शौचालयों के कुछ दरवाजे टूटे हुए मिले। इसके अलावा रसोई की स्थिति और खुले में रखे भोजन को लेकर भी चिंता जताई गई। अधिकारियों ने इन व्यवस्थाओं को बच्चों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षित वातावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना।

दो बच्चों की शिकायत के बाद पहुंची टीम, दस्तावेजों और कर्मचारियों की पहचान की जांच

आयोग अध्यक्ष निवेदिता शर्मा के अनुसार, बाल कल्याण समिति के पास मदरसे से भागकर पहुंचे दो बच्चों ने शिकायत की थी। इसके बाद संबंधित संस्था का निरीक्षण करने के लिए संयुक्त टीम पहुंची। कार्रवाई के दौरान बच्चों के प्रवेश फॉर्म, उपस्थिति रजिस्टर, पंजीयन से जुड़े दस्तावेज और कर्मचारियों की पहचान संबंधी रिकॉर्ड की जांच की गई।

अधिकारियों ने बताया कि संस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के पास पहचान पत्र नहीं मिलने की बात भी सामने आई। बच्चों की देखरेख करने वाले कर्मचारियों की पहचान, उनकी जिम्मेदारियों और निगरानी व्यवस्था की जांच की जा रही है।

आयोग के अनुसार, मदरसे में चार से 11 वर्ष तक के बच्चों को कायदा और कुरान की शिक्षा दी जाती है। बच्चों को सामान्य स्कूली शिक्षा किस तरह उपलब्ध कराई जा रही है और संस्था के संचालन से संबंधित नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। मदरसे के पास मान्यता नहीं होने की बात सामने आने के बाद संबंधित दस्तावेजों की जांच पर जोर दिया गया है।

निरीक्षण के बाद बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति की निगरानी में रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक, शिकायतों और दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मदरसा प्रबंधन ने दी सफाई, 35-36 साल से संचालन का किया दावा

मदरसे का संचालन देख रहे मोहम्मद साबिर ने बताया कि दारुल कुरान करीब 35 से 36 वर्षों से वक्फ बोर्ड के माध्यम से संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को छुट्टी होने के कारण कई बच्चे और कर्मचारी परिसर में मौजूद नहीं थे। कुछ बच्चे अपने घर गए हुए थे, इसलिए निरीक्षण के समय बच्चों की संख्या कम थी।

साबिर के मुताबिक, मदरसे में लगभग 40 बच्चे और 14 से 15 बालिकाएं दर्ज हैं। यहां धार्मिक शिक्षा के साथ हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भी पढ़ाई जाती है। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रवेश फॉर्म, उपस्थिति रजिस्टर और पंजीयन से संबंधित दस्तावेज मांगे थे, जिन्हें उपलब्ध कराया गया। यदि दस्तावेजों में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे पूरा करने की बात भी उन्होंने कही।

सीसीटीवी कैमरों के बंद होने के आरोपों पर प्रबंधन ने कहा कि परिसर में कैमरे चालू हैं और अधिकारी चाहें तो उनकी जांच कर सकते हैं। साबिर ने यह भी आरोप लगाया कि टीम उनके चाचा और कुछ बच्चों को प्रबंधन को जानकारी दिए बिना अपने साथ ले गई, जिससे बच्चों के अभिभावक परेशान हैं।

फिलहाल, मदरसे की मान्यता, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, साफ-सफाई और देखरेख से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। बच्चों की ओर से की गई शिकायतों और प्रबंधन की सफाई के बीच अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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