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मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की निर्विरोध जीत पक्की, दो पर्चे खारिज

by:Anuradha

मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की निर्विरोध जीत लगभग सुनिश्चित हो गई है। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार समेत दो लोगों के नामांकन पत्र खारिज किए जाने के बाद अब चुनावी मैदान में केवल हरदीप सिंह पुरी ही बचे हैं।

क्यों और कैसे खारिज हुए नामांकन?

रिटर्निंग ऑफिसर के मुताबिक, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार कान्ते सयान्ना और कांग्रेस समर्थित राजकुमार लोहानी के पर्चे खारिज कर दिए गए।

इससे पहले, कांग्रेस नेता हेमंत कटारे और दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर आपत्ति जताई थी। उनका दावा था कि पुरी द्वारा दाखिल किए गए फॉर्म-26 का हलफनामा अधूरा और अमान्य है। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी उमेश शर्मा ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पुरी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है और उनके कागजातों में कोई खामी नहीं है।

औपचारिक घोषणा और कांग्रेस का अगला कदम

हरदीप पुरी का राजनीतिक सफर और सीट का समीकरण

यह राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। वर्तमान में हरदीप पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं, जिनका कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। मध्य प्रदेश विधानसभा में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण यहां से उनकी जीत की राह पहले से ही काफी आसान मानी जा रही थी।

बता दें कि राजनीति में आने से पहले हरदीप सिंह पुरी 1974 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी रह चुके हैं। उनका 39 वर्षों का शानदार राजनयिक करियर रहा है, जिसमें वे संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। फरवरी 2013 में सेवानिवृत्ति के बाद, उन्होंने जनवरी 2014 में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी।

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