मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की लोकप्रिय सामाजिक सुरक्षा योजना ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ (PMJJBY) के नाम पर लगभग 9.5 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। शातिर ठगों के एक संगठित गिरोह ने ग्वालियर, मुरैना, रतलाम और राजस्थान की सीमाओं तक फैले नेटवर्क के जरिए जिंदा इंसानों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया और बीमा कंपनियों से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर क्लेम की रकम ऐंठ ली। इस मामले में मध्य प्रदेश सीआईडी ने अब तक दो एफआईआर दर्ज की हैं, जिसमें 121 मामलों में सीधी ठगी की पुष्टि हो चुकी है।
. कैसे काम करता था यह शातिर सिंडिकेट?
इस घोटाले के तहत गिरोह ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का झांसा देकर उनके दस्तावेज लिए और उनकी जानकारी के बिना अलग-अलग बैंकों में संदिग्ध खाते खुलवाकर बीमा पॉलिसियां ले लीं। गिरोह खुद ही 1 या 2 किश्तें जमा करवाता था और फिर बीमा लेने के कुछ समय के भीतर ही नगरीय निकायों के कर्मचारियों से मिलीभगत करके फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लेता था। इसके बाद बीमा क्लेम की पूरी रकम गिरोह के नामांकित लोगों के खातों में ट्रांसफर करवा ली जाती थी। जांच में सामने आया है कि रतलाम के फेडरल बैंक के 62 खातों से ही ढाई करोड़ रुपये क्लेम किए गए, जिन्हें राजस्थान और एमपी के सीमावर्ती इलाकों (जैसे सवाई माधोपुर और श्रीगंगानगर) के एटीएम से तुरंत नकद निकाल लिया जाता था।
बैंक केवाईसी में एक जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से खुला राज
इस संगठित फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब जांच एजेंसियों ने पाया कि अलग-अलग बीमा धारकों के दस्तावेजों और बैंक खातों में एक ही मोबाइल नंबर और एक जैसी ईमेल आईडी (जैसे ilovemyindia091@gmail.com या r.jain11.2.89@gmail.com) दर्ज थीं। इसके अलावा, एक ही पते पर दर्जनों बैंक खाते और एक ही हफ्ते या महीने में एक ही परिवार के कई सदस्यों की मौत दर्शाए जाने जैसे असामान्य पैटर्न ने पुलिस का शक गहराया। फिलहाल सीआईडी द्वारा 482 से अधिक संदिग्ध बैंक खातों की गहनता से जांच की जा रही है और इसका दायरा इंदौर, बेंगलुरु तथा छत्तीसगढ़ तक फैल चुका है।

