By: Ravindra Singh
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। प्रदेश के साढ़े चार लाख से अधिक कर्मचारी अभी 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता प्राप्त कर रहे हैं, जबकि कई राज्यों में यह दर 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ऐसे में मध्य प्रदेश के कर्मचारी भी 2 प्रतिशत DA बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी मामलों के जानकारों के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 तक महंगाई भत्ते के इस अंतर के कारण करीब 420 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं हुई है। यह आंकड़ा अनुमानित गणना पर आधारित है।
कई राज्यों में 60% DA, MP के कर्मचारी बढ़ोतरी के इंतजार में
महंगाई भत्ता कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई के असर से राहत देने के लिए दिया जाता है। इसकी गणना मूल वेतन यानी बेसिक सैलरी के आधार पर होती है। इसलिए DA में होने वाली छोटी-सी बढ़ोतरी का भी कर्मचारियों की मासिक आय पर असर पड़ता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, तमिलनाडु, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में कर्मचारियों को 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलने की बात कही गई है। वहीं, मध्य प्रदेश में फिलहाल DA की दर 58 प्रतिशत है। इस वजह से प्रदेश के कर्मचारी केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने की मांग उठा रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के बीच महंगाई भत्ते में समय पर संशोधन जरूरी है। इससे घरेलू बजट, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों को संभालने में मदद मिलती है।
पिछली DA बढ़ोतरी का भुगतान भी देरी से हुआ
मध्य प्रदेश सरकार ने जुलाई 2025 से महंगाई भत्ते को 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया था। हालांकि, बढ़े हुए DA का भुगतान कर्मचारियों को अप्रैल 2026 से शुरू हुआ। जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक की बकाया राशि का भुगतान छह किस्तों में करने का निर्णय लिया गया था।
अब कर्मचारी 2 प्रतिशत की अगली बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, DA में संशोधन और उसके भुगतान में देरी होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
प्रस्तावित बढ़ोतरी से अलग-अलग वेतन श्रेणियों के कर्मचारियों को मिलने वाली अतिरिक्त राशि भी अलग होगी। इसकी वजह यह है कि महंगाई भत्ते की गणना मूल वेतन के अनुपात में की जाती है।
सात महीने में 420 करोड़ रुपये का अनुमानित अंतर, कर्मचारियों को कितना नुकसान?
कर्मचारी मामलों के जानकारों ने जनवरी से जुलाई 2026 तक के सात महीनों के आधार पर 2 प्रतिशत DA के अंतर का अनुमान लगाया है। उनके मुताबिक, इस अवधि में करीब 420 करोड़ रुपये की राशि का अंतर सामने आया है। यह गणना महंगाई भत्ते और पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (DR) के अंतर पर आधारित बताई गई है। इसे सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बचत का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
वेतन श्रेणियों के हिसाब से सात महीनों में अनुमानित अंतर इस प्रकार बताया गया है:
- प्रथम श्रेणी के अधिकारी: लगभग 11,186 से 19,740 रुपये।
- द्वितीय श्रेणी के अधिकारी: लगभग 7,854 से 8,918 रुपये।
- तृतीय श्रेणी के कर्मचारी: लगभग 2,730 से 6,874 रुपये।
- चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी: लगभग 2,170 से 2,520 रुपये।
मासिक स्तर पर भी 2 प्रतिशत DA का अंतर कर्मचारियों की आय में अलग-अलग प्रभाव डाल सकता है। कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए कुछ सौ रुपये की अतिरिक्त राशि भी घरेलू खर्चों में राहत दे सकती है, जबकि अधिक मूल वेतन वाले अधिकारियों को इससे ज्यादा लाभ मिल सकता है।
फिलहाल मध्य प्रदेश के कर्मचारी अगली DA बढ़ोतरी को लेकर सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। महंगाई भत्ते में संशोधन कब होगा और इसका लाभ किस तारीख से दिया जाएगा, इस बारे में अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
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