मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल की कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा के जॉब कार्ड और मजदूरी भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सात पंचायतों में दो साल के दौरान करीब 20 करोड़ रुपये के भुगतान में गड़बड़ी का संदेह जताया गया है। कई जॉब कार्ड में ऐसे नाम, पते और पारिवारिक विवरण दर्ज मिले, जिनकी वास्तविकता पर सवाल उठ रहे हैं।
वोटरों से ज्यादा जॉब कार्ड, रिकॉर्ड में कई संदिग्ध नाम
मुरैना जिले की बहरारा जागीर ग्राम पंचायत में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 2,174 बताई गई है, जबकि मनरेगा रिकॉर्ड में 3,709 जॉब कार्ड दर्ज हैं। इनमें बड़ी संख्या में कार्डों पर फोटो और पूरा पता दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है।कुछ जॉब कार्ड में एक ही व्यक्ति को कई लोगों के पिता या पति के रूप में दर्ज किया गया है। स्थानीय लोगों से जानकारी लेने पर कुछ ऐसे नाम भी सामने आए, जिनके गांव में रहने की पुष्टि नहीं हो सकी।इसी तरह पहाड़गढ़ क्षेत्र की कुकरोली पंचायत में कुछ जॉब कार्डों में पिता के नाम की जगह A, B, C जैसे अक्षर दर्ज होने का दावा किया गया है।
बिना मजदूरी किए खातों में पहुंचा पैसा?
जडेरू पंचायत के धोबिनी गांव से जुड़ा एक मामला भी सवाल खड़े करता है। रिपोर्ट के अनुसार, रफीक खान और उनके परिवार के सदस्यों के नाम मनरेगा जॉब कार्ड में दर्ज हैं और रिकॉर्ड में उनके द्वारा तालाब निर्माण में मजदूरी करने की जानकारी मौजूद है। हालांकि, रफीक का दावा है कि उनके परिवार ने न तो जॉब कार्ड बनवाया और न ही मनरेगा में मजदूरी की। एक अन्य मामले में रकैरा गांव के मुकेश सेन के जॉब कार्ड में 45 दिन मनरेगा मजदूरी दर्ज होने की बात सामने आई है। मुकेश का दावा है कि उस दौरान उनके हाथ में फ्रैक्चर था और वे मजदूरी करने की स्थिति में नहीं थे।
कई बैंक खातों के इस्तेमाल का भी आरोप
मामले में बैंक खातों के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ जॉब कार्डधारकों के खाते एयरटेल पेमेंट बैंक और फिनो बैंक में होने की जानकारी मिली है। वहीं एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसके परिवार से जुड़े 30-35 बैंक खातों का इस्तेमाल मनरेगा भुगतान के लिए किया जाता था।कुछ खातों पर पुलिस कार्रवाई के बाद रोक लगाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच और उसके अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
प्रशासन की जांच पर टिकी नजर
मनरेगा जैसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम में फर्जी जॉब कार्ड, गलत नाम-पते और संदिग्ध मजदूरी भुगतान के आरोप बेहद गंभीर हैं। अब निगाह प्रशासनिक जांच पर है। जांच में यदि रिकॉर्ड में दर्ज अनियमितताएं सही पाई जाती हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और सरकारी धन की वसूली की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

