By: Ravindra Singh
Weather : मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक रूप से विदाई हो गई है। 24 जून को प्रवेश करने के बाद मानसून का असर प्रदेश में लगभग 100 दिनों तक बना रहा और 3 अक्टूबर को यह पूरी तरह से विदा हो गया। मानसून की रवानगी के साथ ही राज्य का मौसम अब एक नए दौर में कदम रख रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अक्टूबर के महीने में दिन के समय तेज धूप और हल्की गर्मी महसूस होगी, जबकि रातों में तापमान गिरने से ठंडक घुलने लगेगी।
आइए विस्तार से समझते हैं प्रदेश में मानसून का कुल लेखा-जोखा और आने वाले दिनों के मौसम का हाल।
दिन में धूप और रात में ठंडक का एहसास
Weather मानसून विदा होते ही मध्य प्रदेश के अधिकतर शहरों में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। अब अगस्त-सितंबर जैसी भारी और लगातार बारिश का दौर थम जाएगा।
- दिन और रात का तापमान: आने वाले दिनों में ज्यादातर इलाकों में आसमान साफ रहेगा, जिससे दिन में पारा चढ़ेगा। वहीं, रात के न्यूनतम तापमान में गिरावट आएगी, जो 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ सकता है।
- अक्टूबर में छिटपुट बारिश: भले ही मानसून चला गया हो, लेकिन मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं रहेगा। स्थानीय प्रभाव और मौसम प्रणालियों के कारण कुछ हिस्सों में हल्की फुहारें देखने को मिल सकती हैं।
7 अक्टूबर से पूर्वी मध्य प्रदेश में फिर भीगेंगे कुछ जिले
Weather मौसम विभाग का अनुमान है कि 4, 5 और 6 अक्टूबर को राज्यभर में मौसम साफ और शुष्क रहेगा। हालांकि इसके बाद मौसम में हल्का बदलाव आ सकता है:
- 7 अक्टूबर का अलर्ट: पूर्वी मध्य प्रदेश के रीवा, सतना, पन्ना, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर और डिंडौरी जिलों में बादल गरजने और तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
- 8 और 9 अक्टूबर: इन दो दिनों में भी प्रदेश के कुछ स्थानीय हिस्सों में हल्की वर्षा होने की संभावना बनी रहेगी।
मानसून 2026 का कुल रिपोर्ट कार्ड: सामान्य से 4 प्रतिशत कम वर्षा
Weather इस साल 1 जून से 30 सितंबर तक के पूरे मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिमी (लगभग 35.8 इंच) बारिश दर्ज की गई।
- औसत बारिश से तुलना: राज्य में सामान्य बारिश का औसत आंकड़ा 949.5 मिमी (37.3 इंच) रहता है। इस तरह पूरे राज्य में कुल मिलाकर सामान्य से करीब 4% कम बारिश हुई।
- सफर के 100 दिन: 24 जून को दस्तक देने के 9 दिनों के भीतर मानसून पूरे प्रदेश में फैल गया था। इस दौरान जून में 6 दिन, जुलाई और अगस्त में पूरे 31-31 दिन, सितंबर में 30 दिन और अक्टूबर के शुरुआती 2 दिनों तक मानसूनी गतिविधियां दर्ज हुईं।
पूर्वी बनाम पश्चिमी एमपी: बारिश के आंकड़ों में बड़ा अंतर
Weather प्रदेश के दोनों हिस्सों में बारिश का असमान वितरण देखने को मिला:
- पूर्वी मध्य प्रदेश: जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग वाले पूर्वी क्षेत्र में कुल मिलाकर सामान्य से 4% अधिक बारिश हुई। हालांकि, इसी क्षेत्र के बालाघाट, जबलपुर, दमोह, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सिवनी, रीवा और सागर जैसे जिलों में औसत से 5 से 21 प्रतिशत तक की कमी भी रही।
- पश्चिमी मध्य प्रदेश: इंदौर, उज्जैन, भोपाल और चंबल-ग्वालियर संभाग से जुड़े पश्चिमी क्षेत्र में बारिश का कोटा कम रहा। यहाँ औसत से 12% कम पानी गिरा। धार, इंदौर, देवास, रतलाम, मंदसौर, नीमच, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर और उज्जैन समेत कई जिलों में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई।
25 जिलों में कोटा पूरा, 30 जिलों में रही पानी की कमी
Weather प्रदेश के कुल 55 जिलों के बारिश के आंकड़ों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
1. सामान्य या अधिक बारिश वाले 25 जिले
भोपाल, ग्वालियर, दतिया, गुना, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।
2. सामान्य से कम बारिश वाले 30 जिले
इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, सीहोर, रायसेन, विदिशा, छिंदवाड़ा, शाजापुर, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार, आलीराजपुर, नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, देवास, सिवनी और शिवपुरी।
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