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MPBDC में अधिकारी और ठेकेदारों का गड़जोड़ उजागर, घटिया निर्माण होने पर एमडी ने तुडवाई बिल्डिंग

भोपाल। मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (MPBDC) की निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुजालपुर और उज्जैन संभाग में हुए निरीक्षण के दौरान कई निर्माण कार्यों में ऐसी खामियां सामने आईं कि अधिकारियों को मौके पर ही गुणवत्ताहीन हिस्सों को ध्वस्त कराने के निर्देश देने पड़े। इस घटनाक्रम ने सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (MPBDC) के प्रबंध संचालक सीबी चक्रवर्ती ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी निर्माण में लापरवाही और गुणवत्ताहीन काम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कल शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को शुजालपुर एवं उज्जैन संभाग के स्थल निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं पर उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

एमडी चक्रवर्ती एवं ईएनसी श्रीवास्तव द्वारा शुक्रवार को किये निरीक्षण में निर्माण कार्यों में गंभीर खामियां सामने आईं। मामले को तत्काल संज्ञान में लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उनके निर्देश पर मौके पर ही सुधार कार्य शुरू कराया गया तथा गुणवत्ताहीन निर्माण को तत्काल ध्वस्त करा दिया गया।

निरीक्षण में खुली निर्माण गुणवत्ता की पोल

MPBDC के प्रबंध संचालक सीबी चक्रवर्ती और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण में कई निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। स्थिति इतनी गंभीर बताई गई कि कुछ निर्माण हिस्सों को तत्काल हटाने और दोबारा बनाने का निर्णय लेना पड़ा। इससे यह सवाल उठ रहा है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी निरीक्षण की प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही।

ठेकेदारों, अधिकारियों और कंसल्टेंसी की भूमिका पर सवाल

निरीक्षण के बाद ठेकेदार, परियोजना प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और गुणवत्ता परीक्षण से संबंधित कंसल्टेंसी फर्मों पर कार्रवाई की गई। इससे संकेत मिलता है कि निर्माण कार्यों में केवल तकनीकी कमी ही नहीं, बल्कि निगरानी स्तर पर भी चूक हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते निरीक्षण नहीं होता, तो यही निर्माण कार्य भविष्य में सुरक्षा और संसाधनों दोनों के लिए खतरा बन सकते थे।

बार-बार सामने आ रहे मामले बढ़ा रहे चिंता

बुधनी के सीएम राइज स्कूल सहित अन्य परियोजनाओं में भी हाल के दिनों में निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं। लगातार अलग-अलग परियोजनाओं में खामियां सामने आने से यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या समस्या केवल कुछ ठेकेदारों तक सीमित है या फिर पूरी निगरानी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।

जवाबदेही तय करने की चुनौती

कार्रवाई के बाद विभाग में सख्ती का संदेश जरूर गया है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल निर्माण तोड़ने और कुछ लोगों पर कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान होगा। सरकारी परियोजनाओं पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये जनता के कर से आते हैं, ऐसे में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि निर्माण की गुणवत्ता शुरुआत से ही मानकों के अनुरूप रहे।

अब नजर इस बात पर है कि यह अभियान केवल निरीक्षण और कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए दीर्घकालिक और संस्थागत बदलाव भी किए जाते हैं।

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