जबलपुर में GST अधिकारी के घर लोकायुक्त का छापा, 1.03 करोड़ की आय के मुकाबले 3.78 करोड़ का खर्च; कई संपत्तियां जांच के दायरे में

Jabalpur

By: Ravindra Singh

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में लोकायुक्त की टीम ने वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के आवास पर छापेमारी कर आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच शुरू की है। शुरुआती जांच में अधिकारी की घोषित आय और अनुमानित खर्च के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। जांच एजेंसी को अधिकारी और उनके परिजनों के नाम पर अलग-अलग शहरों में जमीन, मकान, फ्लैट, वाहन और बीमा पॉलिसियों से जुड़ी जानकारियां मिली हैं। अब इन संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और उन्हें खरीदने में इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत की पड़ताल की जा रही है।

सुबह 6 बजे पहुंची लोकायुक्त की टीम, आय और खर्च में मिला बड़ा अंतर

मंगलवार, 27 अक्टूबर की सुबह करीब 6 बजे लोकायुक्त की टीम ने जबलपुर स्थित मनीष कुमार जैन के घर पर कार्रवाई शुरू की। बताया गया है कि अधिकारी वर्तमान में दमोह में पदस्थ हैं। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत लोकायुक्त एसपी अंजूलता पटले को मिली थी।

शिकायत के सत्यापन के दौरान अधिकारियों की कमाई और खर्च के बीच असमानता सामने आने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच में मनीष कुमार जैन की कुल आय करीब 1.03 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि उनके खर्च का अनुमान लगभग 3.78 करोड़ रुपये लगाया गया है। इस तरह सामने आए आंकड़ों के अनुसार, आय से करीब 2.74 करोड़ रुपये अधिक खर्च का हिसाब मिला है।

लोकायुक्त की शुरुआती गणना में अनुपातहीन व्यय का प्रतिशत 264.64 बताया गया है। हालांकि, यह प्रारंभिक आंकड़ा है। अंतिम स्थिति दस्तावेजों की जांच और आय के वैध स्रोतों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।

जबलपुर, भोपाल और सागर में संपत्तियों की जानकारी, वाहनों और बीमा निवेश की भी पड़ताल

जांच के दौरान अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कई संपत्तियों का विवरण सामने आया है। जबलपुर में मनीष कुमार जैन के नाम 278.74 वर्ग मीटर जमीन होने की जानकारी मिली है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.43 करोड़ रुपये बताई गई है। उनकी पत्नी निधि जैन के नाम पर शहर में दो प्लॉट होने की जानकारी भी सामने आई है। इनकी अनुमानित कीमत लगभग 19.12 लाख रुपये है।

भोपाल में निधि जैन के नाम पर 180 वर्ग मीटर जमीन पर बना बंगला मिला है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 22.87 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा 83.18 वर्ग मीटर के एक फ्लैट की कीमत लगभग 13.34 लाख रुपये आंकी गई है। पत्नी के नाम पर 402.41 वर्ग मीटर के एक अन्य प्लॉट की जानकारी भी जांच में शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत 13.68 लाख रुपये बताई गई है।

सागर जिले के बंडा में अधिकारी की मां शशि जैन के नाम पर एक प्लॉट और मकान होने की जानकारी मिली है। इसकी अनुमानित लागत 23.49 लाख रुपये बताई गई है। वहीं, पिता कोमल चंद जैन के नाम पर भी बंडा में मकान और एक अन्य प्लॉट पर बने मकान का विवरण सामने आया है। इनकी अनुमानित कीमत क्रमशः 43.19 लाख रुपये और 2.86 लाख रुपये बताई गई है।

इसके अलावा, निधि जैन के नाम पर मारुति स्विफ्ट कार और सुजुकी एक्सेस दोपहिया वाहन होने की जानकारी मिली है। दोनों वाहनों की कुल अनुमानित कीमत 5.10 लाख रुपये बताई गई है। अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा पॉलिसियों में करीब 33.94 लाख रुपये खर्च किए जाने का भी अनुमान है। लोकायुक्त इन निवेशों से जुड़े दस्तावेजों और भुगतान के स्रोतों की जांच कर रही है।

तीन टीमों ने संभाली कार्रवाई, संपत्तियों और धन के स्रोत की जांच जारी

छापेमारी के लिए लोकायुक्त ने तीन अलग-अलग टीमें गठित की थीं। पहली टीम में डीएसपी नीतू त्रिपाठी और निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। दूसरी टीम की जिम्मेदारी डीएसपी रेखा प्रजापति को दी गई, जबकि निरीक्षक शशि मस्कुले और जितेंद्र यादव भी इसमें शामिल थे। तीसरी टीम में निरीक्षक रजनी तिवारी सहित अन्य सदस्य कार्रवाई कर रहे हैं।

अब जांच एजेंसी संपत्तियों की खरीद से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों के लेनदेन, बीमा पॉलिसियों में किए गए निवेश और आय के वैध स्रोतों का मिलान करेगी। परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति होने मात्र से किसी तरह की अनियमितता साबित नहीं होती। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संपत्तियां किस धनराशि से खरीदी गईं और उनका वास्तविक स्वामित्व किसके पास है।

फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है। जब्त दस्तावेजों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आय और खर्च के बीच मिले अंतर में कितनी राशि का संतोषजनक हिसाब उपलब्ध है और क्या वास्तव में आय से अधिक संपत्ति अर्जित की गई है।

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