मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई लोकायुक्त कार्रवाई के बाद एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। विभाग के दो कर्मचारियों के रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद, जब जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री (EE) से इस बारे में सवाल किया गया, तो उनका कथित तौर पर दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में सागर लोकायुक्त की टीम ने पन्ना में जिला न्यायालय के सामने स्थित जल संसाधन विभाग के दफ्तर पर एक बड़ी छापामार कार्रवाई की थी। यह कार्रवाई मझगांय बांध की नहर से जुड़े बिलों को पास करने के एवज में अवैध वसूली की शिकायत पर की गई थी।
- लोकायुक्त टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए लेखपाल दीपक परिहार (15 हजार रुपये की रिश्वत) और लिपिक अरविंद पाठक (30 हजार रुपये की रिश्वत) को दबोचा था।
- इस अचानक हुई कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया था।
‘परसेंटेज नहीं, जो खुशी से दे दे…’
इस घूसकांड के सामने आने के बाद जब मीडिया ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री (EE) सी.बी. अहिरवार से प्रतिक्रिया मांगी, तो उनका एक कथित वीडियो वायरल हो गया। वायरल वीडियो में अधिकारी यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि “मेरा कोई परसेंटेज फिक्स नहीं है, बल्कि जो खुशी से दे दे, मैं वो ले लेता हूं।”
हालांकि, इस वायरल वीडियो और बयान की प्रामाणिकता व संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इस बयान के सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और सुशासन पर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं।
सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
लोकायुक्त की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने सरकारी दफ्तरों में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। एक तरफ जहां कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों के इस तरह के कथित बयान यह दर्शाते हैं कि प्रशासनिक महकमे में भ्रष्टाचार के प्रति किस हद तक बेपरवाह रवैया अपनाया जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शासन स्तर पर इस पूरे प्रकरण और वायरल बयान के बाद क्या सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।