by Anuradha
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सामने आए बहुचर्चित पूर्व मॉडल ट्विषा शर्मा की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सर्वोच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण हलफनामा प्रस्तुत किया है। इस हलफनामे के जरिए सीबीआई ने साफ तौर पर कहा है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई भोपाल की स्थानीय अदालत में निष्पक्ष तरीके से होना अत्यंत कठिन है। जांच एजेंसी के इस बड़े दावे के बाद से न्यायिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पूर्व जिला जज सास के रसूख से गवाहों और ट्रायल पर असर की आशंका
सीबीआई ने अपने हलफनामे में मुख्य आरोपी और मृतका की सास गिरिबाला सिंह के प्रभाव तथा रुतबे का विशेष रूप से उल्लेख किया है। उल्लेखनीय है कि गिरिबाला सिंह एक पूर्व जिला जज (District Judge) रह चुकी हैं।
जांच एजेंसी का तर्क है कि आरोपी के उच्च पद पर रहने और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ के कारण निचली अदालत की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है, साथ ही गवाहों को डराने या उन पर दबाव बनाने की भी पूरी आशंका बनी हुई है। सीबीआई ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि घटना के फौरन बाद घटनास्थल से छेड़छाड़ कर साक्ष्यों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की गई थी, और शुरुआती पुलिस जांच में भी आरोपी के अनुचित हस्तक्षेप के पर्याप्त सबूत मिले हैं।
मृतका के पिता की मांग को मिला सीबीआई का समर्थन
इससे पहले, मृतका ट्विषा शर्मा के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस पूरे मामले के ट्रायल को मध्य प्रदेश राज्य से बाहर किसी अन्य स्थान (विशेषकर दिल्ली) में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था।
पिता का मुख्य तर्क था कि पूर्व जज होने के नाते आरोपी का स्थानीय स्तर पर गहरा प्रभाव है, जिससे निष्पक्ष न्याय मिलने की राह में बाधा आ सकती है। अब सीबीआई द्वारा सर्वोच्च अदालत में दाखिल यह हलफनामा सीधे तौर पर मृतका के पिता की अर्जी का समर्थन करता दिखाई दे रहा है। इस खुलासे के बाद केस को दूसरे राज्य में ट्रांसफर किए जाने की संभावना और अधिक प्रबल हो गई है।
636 पन्नों की चार्जशीट में दर्ज हैं दहेज हत्या के गंभीर आरोप
गौरतलब है कि पूर्व मॉडल ट्विषा शर्मा बीते 12 मई को भोपाल स्थित अपनी ससुराल में संदिग्ध और रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। मामले की गंभीरता को भांपते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इसकी उच्चस्तरीय जांच सीबीआई को सौंपी थी।
अपनी विस्तृत जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह (जो पेशे से वकील हैं) और उनकी मां सह-आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह के विरुद्ध लगभग 636 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें दोनों पर दहेज हत्या (Dowry Death) के गंभीर आरोप तय किए गए हैं। फिलहाल, सीबीआई के इस हलफनामे के सामने आने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के आगामी निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।