Imlia Gram Panchayat: मुरैना में मनरेगा के रिकॉर्ड पर बड़ा सवाल: मौत के सालों बाद भी मजदूरी करते मिले मृतक!

Imlia Gram Panchayat मुरैना की इमलिया ग्राम पंचायत में मनरेगा यानी अब वीबी-जीरामजी के तहत मजदूरी से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जांच में ऐसे जॉब कार्ड मिले हैं, जिनमें संबंधित मजदूरों की मृत्यु के कई साल बाद तक मजदूरी और भुगतान दर्ज है।

तालाब, सड़क और सीसी रोड जैसे निर्माण कार्यों में इन नामों पर काम और भुगतान का रिकॉर्ड मौजूद है। वहीं, संबंधित परिवारों का दावा है कि उन्हें इन भुगतानों की कोई राशि नहीं मिली। कुछ मामलों में मृतक के पुराने जॉब कार्ड में बाद में दूसरे लोगों के नाम भी जोड़े गए हैं।

मौत के बाद भी सक्रिय रहे जॉब कार्ड

Imlia Gram Panchayat पड़ताल में सामने आया कि कुछ मजदूरों की मृत्यु 10 से 15 साल पहले हो चुकी थी, लेकिन उनके जॉब कार्ड लंबे समय तक सक्रिय रहे। रिकॉर्ड में उनके नाम से अलग-अलग निर्माण कार्यों में मजदूरी दर्ज की गई और भुगतान भी दिखाया गया।

दिलीप के मामले में उनका जॉब कार्ड वर्ष 2008 में बना था और बीमारी के चलते 2010 में उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बावजूद रिकॉर्ड में मई 2026 तक भुगतान दर्ज मिला। परिवार का कहना है कि उन्हें इस मजदूरी का कोई पैसा नहीं मिला।

मृत्यु के वर्षों बाद बेटों और अन्य नामों पर भुगतान

Imlia Gram Panchayat महाराज सिंह की मृत्यु जनवरी 2023 में हुई थी, लेकिन उनके जॉब कार्ड में इसके बाद भी मजदूरी का रिकॉर्ड सामने आया। कार्ड में उनके बेटों रामवीर और कमलेश के नाम से भुगतान दर्ज है। परिवार का कहना है कि उन्हें यह राशि प्राप्त नहीं हुई।

इसी तरह दामोदर की जुलाई 2022 में मृत्यु हो चुकी थी। उनके जॉब कार्ड में बाद में शुभम और विसन के नाम जोड़े गए। तालाब और सड़क निर्माण से जुड़े कामों में भुगतान का रिकॉर्ड मई 2026 तक दर्ज मिला।

15 साल पहले मृत लक्ष्मी के नाम भी मजदूरी

Imlia Gram Panchayat एक अन्य मामले में लक्ष्मी की करीब 15 साल पहले मौत हो चुकी थी। उनके पति मुन्ना के जॉब कार्ड में इसके बाद भी सड़क और तालाब निर्माण से संबंधित मजदूरी दर्ज मिली। बाद में इसी कार्ड में गुड्डी का नाम भी जोड़े जाने की बात सामने आई।

परिवार का आरोप है कि मजदूरी के नाम पर रिकॉर्ड में भुगतान दिखने के बावजूद उन्हें कभी कोई राशि नहीं मिली। इसके अलावा एक महिला की करीब एक दशक पहले शादी होकर इंदौर चले जाने के बावजूद इमलिया पंचायत के रिकॉर्ड में उसके नाम से मजदूरी दर्ज मिली।

मामले में अब सरकारी रिकॉर्ड, जॉब कार्ड, भुगतान विवरण और वास्तविक काम की जांच अहम होगी। यदि रिकॉर्ड में दर्ज भुगतान और वास्तविक लाभार्थियों के बीच अंतर की पुष्टि होती है, तो पंचायत स्तर पर गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला बन सकता है।

Read this: Panchayat Secretary Suspended: रीवा में सरपंच के हस्ताक्षर के बिना पंचायत की राशि निकाली, सचिव शिवेंद्र मिश्रा सस्पेंड

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *