By: Ravindra Singh
Balaghat : बिरसा क्षेत्र में 32 से अधिक बैगा बच्चों की मौत का मामला अभी चर्चा में है। बच्चों की मौत के बीच मलेरिया और मीजल्स के साथ कुपोषण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण की स्थिति में दर्ज किए गए हैं।
अगस्त 2026 तक जिले में 1 लाख 21 हजार 892 बच्चों की जांच की गई। इनमें 27 हजार 839 बच्चे कुपोषित और 3 हजार 741 बच्चे अति कुपोषित पाए गए। बैहर विधानसभा क्षेत्र में ही 1,111 बच्चों को अति कुपोषित बताया गया है। इन आंकड़ों के बाद आदिवासी क्षेत्रों में पोषण सेवाओं और सरकारी योजनाओं की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विधायक ने पोषण व्यवस्था पर उठाए सवाल
Balaghat बैहर विधायक संजय उइके ने जिले में बच्चों की पोषण स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि मार्च से टेक होम राशन की व्यवस्था बंद है। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले बैगा बहुल क्षेत्रों में मिलने वाला टेक होम राशन बच्चों की जरूरत के अनुरूप पर्याप्त पोषण देने वाला नहीं था।
विधायक के मुताबिक, जुलाई 2026 तक 1 लाख 15 हजार 828 बच्चों की जांच में 34 हजार 976 बच्चे उम्र के अनुपात में कम लंबाई वाले पाए गए। वहीं 26 हजार 640 बच्चे अंडरवेट और 9 हजार 266 बच्चों का वजन उनकी लंबाई के हिसाब से कम दर्ज किया गया।
पोषण ट्रैकर के रिकॉर्ड पर भी सवाल
Balaghat पोषण ट्रैकर में दर्ज आंकड़ों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति, नाश्ता और हॉट कुक मील का 100 प्रतिशत रिकॉर्ड दर्ज होने की बात कही गई है।
कुछ रिकॉर्ड में 5 सितंबर 2025 की सरकारी छुट्टी के दिन भी शत-प्रतिशत उपस्थिति और भोजन वितरण दर्ज होने का दावा किया गया है। ऐसे में पोषण ट्रैकर में दर्ज जानकारी और जमीनी स्थिति के बीच किसी तरह का अंतर है या नहीं, इसकी जांच जरूरी मानी जा रही है।
घर-घर पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का दावा
Balaghat बोंदारी आंगनवाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता के अनुसार, मई से स्व-सहायता समूह के माध्यम से बच्चों को दलिया के पैकेट दिए जा रहे हैं। वहीं बच्चों की मौत के बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की बात कही गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी देवेंद्र कुमार सुंदरीयाल ने मामले को देखने की बात कही है।
कुपोषण के आंकड़ों से व्यवस्था पर उठे सवाल
Balaghat जिले में हजारों बच्चों के कुपोषित और अति कुपोषित दर्ज होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि पोषण योजनाओं का लाभ जरूरतमंद बच्चों तक किस स्तर तक पहुंच रहा है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों के रिकॉर्ड, टेक होम राशन और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
बैगा बच्चों की मौत के मामले के बीच सामने आए ये आंकड़े बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर नए सवाल खड़े कर रहे हैं।
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