भिंड: जिले में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान गेहूं और सरसों उपार्जन व्यवस्था को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि सेवा सहकारी संस्था दीनपुरा के जरिए कुछ किसानों की कृषि भूमि के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर उनके नाम पर उपार्जन के लिए पंजीयन कराया गया। इसके बाद संबंधित उपज को उपार्जन केंद्र पर बेचने और भुगतान किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में पहुंचने की बात कही जा रही है। मामले ने उपार्जन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों का दावा- बिना सहमति इस्तेमाल हुए जमीन के रिकॉर्ड
स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में ग्राम बबेडी और भिंड क्षेत्र से जुड़े कई खसरा नंबर सामने आने का दावा किया गया है। जिन किसानों की भूमि के दस्तावेज कथित तौर पर पंजीयन में इस्तेमाल हुए, उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित उपार्जन केंद्र पर अपनी फसल नहीं बेची थी।
किसानों का आरोप है कि उनकी जानकारी या सहमति के बिना भूमि संबंधी रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर पंजीयन प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद उन्हीं विवरणों के आधार पर उपार्जन दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
दूसरे बैंक खाते में भुगतान पहुंचने का दावा
मामले में भुगतान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक उपार्जन की राशि अनोज कुमार शर्मा नामक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाने का दावा किया जा रहा है। बताया जाता है कि संबंधित व्यक्ति सहकारी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
यदि किसानों के नाम और भूमि रिकॉर्ड का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना किया गया है और भुगतान भी किसी अन्य खाते में पहुंचा है, तो यह उपार्जन व्यवस्था की गंभीर जांच का विषय बन जाता है।
किसानों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
मामले को लेकर किसानों और स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। जांच में पंजीयन रिकॉर्ड, संबंधित खसरा नंबर, उपार्जन केंद्र के दस्तावेज और बैंक खातों में हुए भुगतान की जानकारी का मिलान किया जा सकता है।
आरोपों की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार है।