Bhopal : राजधानी भोपाल में दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा और आवासीय सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधीन संचालित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी और हॉस्टल की अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आई हैं।
स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने नियमित कक्षाएं नहीं लगने, पर्याप्त शिक्षक नहीं होने और हॉस्टल में साफ-सफाई की समस्या की बात कही है। हालांकि, विद्यार्थियों की संख्या और शिक्षकों से जुड़े आंकड़ों का विभागीय स्तर पर आधिकारिक सत्यापन किया जाना बाकी है।
190 विद्यार्थियों के लिए महज 3 शिक्षक होने की बात
Bhopal स्कूल में कक्षा पहली से 12वीं तक करीब 190 विद्यार्थी पढ़ते हैं। छात्रों का कहना है कि उनके लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इसी वजह से पढ़ाई प्रभावित होती है और कई बार अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाना पड़ता है।
बच्चों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मौकों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कक्षा में पढ़ाने के लिए आते हैं। यदि यह स्थिति सही है तो दिव्यांग विद्यार्थियों की विशेष शैक्षणिक जरूरतों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
एक साथ बैठ रहे अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थी
Bhopal स्कूल में कक्षा 5, 7 और 8 के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर पढ़ाए जाने की स्थिति सामने आने की बात कही गई है। छात्रों के मुताबिक शिक्षकों की कमी के कारण सभी कक्षाओं का नियमित संचालन नहीं हो पाता।
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सामान्य पढ़ाई के साथ विशेष शिक्षण पद्धति और आवश्यकतानुसार प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है। ऐसे में शिक्षकों की कमी का असर उनकी पढ़ाई पर पड़ने की शिकायत सामने आई है।
हॉस्टल में सीलन, गंदगी और दुर्गंध की शिकायत
Bhopal स्कूल से जुड़े हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर भी विद्यार्थियों ने नाराजगी जताई है। कमरों की दीवारों पर सीलन और खराब स्थिति दिखाई देने की बात सामने आई है। वहीं, वॉशरूम की सफाई व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें हैं।
विद्यार्थियों ने भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि रहने और खाने की सुविधाएं उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं हैं। हॉस्टल में साफ-सफाई की कमी और दुर्गंध की समस्या होने की बात भी बच्चों ने कही।
बच्चों ने कहा- सुविधाएं पर्याप्त नहीं मिल रहीं
Bhopal हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि सरकार की ओर से उनके लिए योजनाएं और बजट निर्धारित किए जाते हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
बच्चों की शिकायत है कि शिक्षा, रहने की व्यवस्था और दूसरी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी समस्याओं के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
बड़े सपने, लेकिन संसाधनों की कमी की शिकायत
Bhopal आठवीं कक्षा के दृष्टिबाधित विद्यार्थियों से उनके भविष्य के सपनों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने डॉक्टर, शिक्षक सहित अलग-अलग पेशों में जाने की इच्छा जताई।
विद्यार्थियों ने बताया कि वे आगे पढ़कर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं। हालांकि, उनके मुताबिक मौजूदा शैक्षणिक व्यवस्था और संसाधनों की कमी उनके सामने चुनौती बनी हुई है।
सांकेतिक भाषा के लिए पर्याप्त व्यवस्था पर सवाल
Bhopal स्कूल में श्रवण बाधित विद्यार्थी भी शिक्षा प्राप्त करते हैं। छात्रों की ओर से पर्याप्त Sign Language Interpreter उपलब्ध नहीं होने की शिकायत की गई है।
ऐसे विद्यार्थियों के लिए सांकेतिक भाषा के माध्यम से प्रभावी संवाद जरूरी होता है। इसलिए इंटरप्रेटर की उपलब्धता और विशेष शिक्षण व्यवस्था को लेकर उठी शिकायतों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
9 सितंबर को छात्रों ने किया था प्रदर्शन
Bhopal विद्यार्थियों ने करीब एक सप्ताह पहले 9 सितंबर को भी स्कूल में प्रदर्शन कर अपनी समस्याएं उठाई थीं। उस समय शिक्षकों की कमी, कक्षाओं के नियमित संचालन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे सामने आए थे।
छात्रों का कहना है कि शिकायतें पहले भी उठाई जा चुकी हैं, लेकिन स्कूल और हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर उनकी चिंताएं अभी बनी हुई हैं।
बजट के बावजूद सुविधाओं पर उठे सवाल
Bhopal दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा और हॉस्टल सहित अन्य सुविधाओं के लिए सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के माध्यम से बजट उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निर्धारित संसाधनों का लाभ विद्यार्थियों तक किस स्तर तक पहुंच रहा है।
शिक्षकों की कमी, हॉस्टल की साफ-सफाई, कमरों की स्थिति, भोजन और सांकेतिक भाषा की व्यवस्था को लेकर सामने आई शिकायतों पर विभागीय स्तर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने शिकायत की बात कही
Bhopal मामले को लेकर जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन जाट ने कहा कि सरकार की ओर से दिव्यांग बच्चों के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन उसका जमीनी स्तर पर सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बच्चों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत बताई और मामले की शिकायत करने की बात कही।
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