By: Ravindra Singh
कांकेर जिले में जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से कराए जा रहे टीनशेड निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बसंत यादव ने इन निर्माण कार्यों की लागत, गुणवत्ता और काम आवंटित करने की प्रक्रिया पर चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सरकारी राशि के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
टीनशेड निर्माण पर 50 से 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान, कांग्रेस ने मांगा हिसाब
बसंत यादव के मुताबिक, भानुप्रतापपुर, दुर्गूकोंदल और कोयलीबेड़ा सहित कांकेर जिले के कई इलाकों में DMF की राशि से टीनशेड का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों पर करीब 50 से 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान जताया गया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने प्रशासन से प्रत्येक निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत बजट, वास्तविक खर्च और कार्यों की पूरी सूची जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने की स्थिति में जनता को यह जानने का अधिकार है कि पैसा कहां और किस काम पर खर्च किया जा रहा है।
निर्माण एजेंसियों और गुणवत्ता को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने निर्माण कार्यों के आवंटन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ स्थानों पर ग्राम पंचायतों को निर्माण एजेंसी बनाकर चुनिंदा लोगों को काम दिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका न रहे। उन्होंने टीनशेड निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सामने आ रही शिकायतों का हवाला देते हुए सभी कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही, निर्माण कार्यों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन और नियमों के अनुरूप पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की बात कही है।
DMF राशि के उपयोग की समीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
बसंत यादव ने कहा कि खनिज प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है। ऐसे में टीनशेड निर्माण पर बड़ी राशि खर्च करने का निर्णय किन प्राथमिकताओं और जरूरतों के आधार पर लिया गया, इसकी जानकारी प्रशासन को देनी चाहिए। कांग्रेस ने DMF से स्वीकृत सभी टीनशेड कार्यों की सूची, प्रत्येक कार्य की लागत, निर्माण एजेंसियों के नाम और वास्तविक खर्च का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके अलावा, कार्य आवंटन में संभावित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और निर्माण कार्यों का तकनीकी मूल्यांकन कराने पर जोर दिया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष का कहना है कि खनिज प्रभावित लोगों के विकास के लिए उपलब्ध राशि का उपयोग जनहित के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ किया जाना चाहिए।
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