दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने संबंधित याचिकाओं पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्तों, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार सहित विभिन्न पक्षों से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि कोई भी अदालत को डरा-धमका नहीं सकता।
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से जुड़े मामले में नोटिस
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर भी विचार किया गया। अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, दिग्विजय सिंह और असदुद्दीन ओवैसी से जुड़े मामलों में भी नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई।
न्यायपालिका पर दबाव बनाने के आरोप पर सख्त रुख
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक जुलूस और नारेबाजी पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बताया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को डराने या धमकाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने विरोध प्रदर्शन और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मामलों में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।
महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी के मामले में जांच के संकेत
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ पुलिस की कथित बदसलूकी और मारपीट के आरोपों पर भी सुनवाई हुई। अदालत ने संकेत दिया कि मामले की जांच के लिए समिति गठित की जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह से संबंधित दस्तावेज दो सीलबंद लिफाफों में पेश करने को कहा।
महिला पत्रकार की गिरफ्तारी पर निर्देश
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली पुलिस को संबंधित महिला पत्रकार को गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यदि महिला पत्रकार जांच में शामिल होती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता से जुड़े पहलुओं पर भी टिप्पणी की।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को विरोध प्रदर्शन से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। अदालत ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित स्थिति से हटाए जाने के फैसले पर भी सवाल किए। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों के आधार पर नहीं लिया गया था और संबंधित समिति पहले ही अपनी रिपोर्ट दे चुकी है।
सभी पक्षों की बात सुनने की बात कही
अदालत ने कहा कि उसके सामने आने वाली हर आवाज महत्वपूर्ण है और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। गृह मंत्रालय, दिल्ली मेट्रो और दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल हलफनामों पर भी अदालत ने संज्ञान लिया। संबंधित पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद मामलों में आगे की सुनवाई होगी।
अगली सुनवाई की तारीख पर स्थिति स्पष्ट नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत ने अगली तारीख की घोषणा नहीं की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सभी मामलों पर लिखित आदेश आने की संभावना है। एसआईआर से संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो सकती है, जबकि विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदियों से जुड़े मामलों की सुनवाई अलग की जाएगी।
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