by:Anuradha
मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के भीतर घमासान मच गया है। राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को आयोजित राहुल गांधी के कार्यक्रम में शामिल न हो पाने के कारण संगठन ने सख्त रुख अपनाते हुए करीब 60 नेताओं को निलंबित कर दिया है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद संगठन में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। निलंबित नेताओं ने बिना किसी कारण बताओ नोटिस के सीधे निलंबन का फरमान जारी किए जाने पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है।
पारिवारिक ट्रेजडी के चलते रैली में नहीं पहुंच पाए थे रोहित राजोरिया
इस कार्रवाई से सबसे ज्यादा चर्चा में आए यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी रोहित राजोरिया ने इस पूरी प्रक्रिया को अन्यायपूर्ण बताया है। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वह 15 अक्टूबर को दिल्ली से अपने घर लौटे थे और ठीक अगले दिन यानी 16 अक्टूबर को उनके चाचा का निधन हो गया था। इस अप्रत्याशित पारिवारिक त्रासदी के कारण वह गहरे मानसिक तनाव और शोक में डूबे हुए थे, जिसके चलते वह एक नवंबर को राहुल गांधी की रैली में शामिल नहीं हो सके।
राजोरिया का शिकवा है कि संगठन के किसी भी पदाधिकारी ने उनकी इस गंभीर पारिवारिक स्थिति की सुध तक नहीं ली। उन्हें अपने निलंबन की जानकारी अखबार या फोन कॉल के जरिए नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से मिली, जिससे उनके परिवार को गहरी ठेस पहुंची है।
बिना पक्ष सुने कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल
रोहित राजोरिया ने पार्टी नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले कार्यकर्ता को नोटिस देकर उसका पक्ष जाना जाना चाहिए। उन्होंने हैरानी जताई कि बिना कोई स्पष्टीकरण मांगे एक झटके में 60 लोगों को कैसे निलंबित किया जा सकता है? उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस मनमाने फैसले के खिलाफ अपनी बात पार्टी हाईकमान के सामने पुरजोर तरीके से रखेंगे।
16 साल का संघर्ष और जेल यात्राओं का जिक्र
अपनी राजनीतिक निष्ठा का हवाला देते हुए राजोरिया ने बताया कि वह साल 2010 से यूथ कांग्रेस के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। पार्टी के आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी के कारण उनके खिलाफ 12 से 13 मुकदमे दर्ज हुए और वह तीन बार जेल भी जा चुके हैं। इतने वर्षों के समर्पण के बाद इस तरह की अपमानजनक कार्रवाई उनके लिए बेहद पीड़ादायक है।
नेहा बोरा ने भी उठाई पुराने कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग
इस पूरे विवाद के बीच यूथ कांग्रेस की नेता नेहा बोरा ने भी संगठन के भीतर मचे असंतोष के बीच अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि पिछले 15-16 सालों से जमीन पर पसीना बहाने वाले पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को हमेशा बड़े मंचों और नेतृत्व के करीब आने से वंचित रखा जाता है। उन्होंने मांग की कि ऐसे कार्यकर्ताओं की मेहनत का सम्मान किया जाना चाहिए।
फिलहाल, 60 नेताओं के एक साथ निलंबन के बाद मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस की यह अंदरूनी कलह सतह पर आ चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या हाईकमान के दखल के बाद इन नाराज नेताओं की बहाיली होगी या संगठन का यह विवाद और अधिक तूल पकड़ेगा।