ग्वालियर के मुरार क्षेत्र के सिरसौद गांव में भागवत कथा और भंडारे से लौट रहे 12 से 15 बच्चों की रतनजोत का फल खाने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ गई। बच्चों ने खेत के किनारे लगे रतनजोत के पौधे के फल को ड्राई फ्रूट समझकर खा लिया था। घर पहुंचते ही बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी। परिजन तत्काल बच्चों को जिला अस्पताल मुरार लेकर पहुंचे, जहां से उन्हें जयारोग्य अस्पताल समूह के कमला राजा अस्पताल रेफर किया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए 8 बच्चों को कमला राजा अस्पताल के पीआईसीयू और 2 बच्चों को न्यू जेएएच के आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
भागवत कथा से लौटते समय बच्चों ने खाया फल
सिरसौद गांव में भागवत कथा का समापन कार्यक्रम था। गांव के करीब 12 से 15 बच्चे कथा सुनने और भंडारे की प्रसादी लेने पहुंचे थे। शाम करीब 5 बजे घर लौटते समय रास्ते में खेत के किनारे बच्चों को रतनजोत का पौधा दिखाई दिया। फल देखकर बच्चों ने उसे खाने वाला ड्राई फ्रूट समझ लिया और आपस में बांटकर खा लिया।
घर पहुंचने के बाद एक-एक कर बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त होने लगे और वे निढाल हो गए। इसके बाद परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे।
8 बच्चे पीआईसीयू और 2 आईसीयू में भर्ती
बच्चों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल मुरार से कमला राजा अस्पताल रेफर किया गया। हरिओम और सेजल की हालत गंभीर होने पर उन्हें न्यू जेएएच के आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। वहीं पूजा 11 वर्ष, आरती 9 वर्ष, दीक्षा 12 वर्ष, प्रवीण 10 वर्ष, दिव्या 8 वर्ष, सुमित 8 वर्ष, गौरव 5 वर्ष और तनु 9 वर्ष को कमला राजा अस्पताल के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया है।
घटना के बाद बच्चों के परिजनों में हड़कंप मच गया। अस्पताल में बच्चों का उपचार शुरू किया गया और चिकित्सकों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. घनश्याम दास तत्काल कमला राजा अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया और चिकित्सकों की टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
डॉक्टरों के अनुसार, समय पर उपचार शुरू होने के बाद बच्चों की स्थिति को नियंत्रण में लाया जा रहा है।