जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ा, सावित्री श्रीवास्तव को मिला जल प्रहरी सम्मान–2026

नई दिल्ली। जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करते हुए नई दिल्ली में सातवें ‘जल प्रहरी सम्मान समारोह–2026’ का आयोजन किया गया। 23 अक्टूबर को विश्व युवक केंद्र में आयोजित इस समारोह में देश के 31 जल संरक्षकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में मध्य प्रदेश की पर्यावरणविद् सावित्री श्रीवास्तव भी शामिल रहीं, जिन्हें ‘वाटर वूमेन’ के नाम से जाना जाता है।

विश्व युवक केंद्र में जुटीं जल संरक्षण से जुड़ी हस्तियां

समारोह में जल संरक्षण, जल स्रोतों को दोबारा जीवंत बनाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। पुरस्कार के निर्णायक मंडल की अध्यक्षता भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई कर रहे हैं, जबकि अनिल सिंह इस आयोजन के संयोजक हैं।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी, सांसद अरुण सिंह, पर्यावरण गतिविधि प्रमुख गोपाल आर्य, जल संरक्षण कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह और उमा शंकर पांडे सहित यूएनईपी तथा आईआईटी कानपुर के प्रतिनिधि, पद्मश्री से सम्मानित हस्तियां और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने जल संरक्षण को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने और भविष्य के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की जरूरत बताई।

मध्य प्रदेश के जल संरक्षकों को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान

इस वर्ष सम्मान के लिए चुने गए देश के 31 जल संरक्षकों में मध्य प्रदेश से सावित्री श्रीवास्तव, मिलिंद पंडित एवं स्वाति संवत्सर और राजीव शर्मा के नाम शामिल रहे। जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए इन नामों को राष्ट्रीय समारोह में स्थान मिला।

‘वाटर वूमेन’ सावित्री श्रीवास्तव के काम को मिली पहचान

मध्य प्रदेश की सावित्री श्रीवास्तव को जल स्रोतों के पुनर्जीवन और भूजल संवर्धन के लिए किए गए प्रयासों के चलते ‘जल प्रहरी सम्मान–2026’ से नवाजा गया। जल संरक्षण के प्रति उनकी सक्रियता के कारण उन्हें ‘वाटर वूमेन’ के रूप में पहचान मिली है।

सावित्री श्रीवास्तव तालाबों और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण, उनके पुनर्जीवन तथा आम लोगों को पानी बचाने के प्रति जागरूक करने जैसे कार्यों से जुड़ी रही हैं। उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना प्रदेश में जल संरक्षण के काम को नई पहचान देता है। यह आयोजन भी इस बात का संदेश देता है कि जल संसाधनों को बचाने के लिए समाज की भागीदारी और निरंतर प्रयास बेहद जरूरी हैं।

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