विकास की ओर कदम: मध्य प्रदेश के पूर्व नक्सल प्रभावित बालाघाट के 100 गांवों में शुरू हुआ विशेष प्रशासनिक अभियान

By: Ravindra Singh

राज्य सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे के बाद उन क्षेत्रों में विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर बालाघाट जिले के 100 ऐसे गांवों को चिह्नित किया गया है जो कभी नक्सल प्रभावित हुआ करते थे। अब इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रशासन के अधिकारी सीधे गांव-गांव पहुंचकर जनता से संवाद कर रहे हैं और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं।

चार क्लस्टर में बंटे गांव, अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

इस महत्वाकांक्षी अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए चिह्नित 100 गांवों को चार क्लस्टर में बांटा गया है। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को 14 दिनों तक आवंटित गांवों का सघन दौरा करने और वहां की जमीनी हकीकत का जायजा लेने के निर्देश दिए गए हैं।

इसी कड़ी में 26 और 28 अक्टूबर को बैहर, बिरसा, लांजी और किरनापुर विकासखंड के गांवों में प्रशासनिक दलों ने पहुंचकर मोर्चा संभाला। लांजी एसडीएम आदित्य नारायण तिवारी, बैहर एसडीएम अनिकेत शांडिल्य, कलेक्टर आदित्य सिंह और अन्य जिला अधिकारियों ने कट्टीपार, सतोना, बरगुड़, देवरबेली, दड़ेकसा, बिलालकसा, सीतापार और बोरवन समेत कई गांवों का दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं से बातचीत करने के साथ ही स्थानीय छात्रावासों का भी निरीक्षण किया।

इन बुनियादी सुविधाओं पर है विशेष जोर

अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरदराज के इन क्षेत्रों में अधोसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करना है। इसके तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है:

  • सड़क एवं संपर्क: गांवों में सड़कों और पुल-पुलियों का निर्माण।
  • पेयजल व सिंचाई: शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और कृषि के लिए सिंचाई की व्यवस्था।
  • शिक्षा एवं स्वास्थ्य: स्कूल भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारना और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना।
  • बिजली एवं पोषण: बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ पोषण स्तर को मजबूत करना।

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाएं अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंच सकें।

स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर

केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रहकर, जिला प्रशासन ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी पूरा ध्यान दे रहा है। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, और मत्स्यपालन जैसी स्वरोजगार गतिविधियों की स्थानीय स्तर पर संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे युवाओं की रुचि और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल आजीविका के साधन विकसित करें ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल सके।

रिपोर्ट के आधार पर तय होगी आगे की रूपरेखा

कलेक्टर आदित्य सिंह ने सभी संबंधित अधिकारियों को तय 14 दिन की समय सीमा के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा पूरा कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की इस पहल से जनजातीय बहुल इन 100 गांवों के दिन बहुरने की पूरी उम्मीद है, जिससे क्षेत्र का समग्र और स्थायी विकास सुनिश्चित हो सकेगा।

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