सेवा ज्योति कार्यक्रम में पीएम मोदी बोले- आलोचकों ने मुझे अपने भीतर झांकना सिखाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को जनसेवा में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद शुरू हुई अपनी राजनीतिक यात्रा को याद किया और कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उनके मन में उपलब्धियों से ज्यादा कृतज्ञता का भाव आता है।

आलोचकों से मिली आत्ममंथन की सीख

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन में अलग-अलग परिस्थितियों और लोगों से उन्हें लगातार सीखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि शुभचिंतकों ने उन्हें प्रोत्साहन दिया, जबकि आलोचकों ने उन्हें अपने भीतर झांकने और आत्ममंथन करने की सीख दी।

उन्होंने कहा कि जिन्होंने उनका साथ दिया, उनसे विश्वास की शक्ति समझी और विरोध करने वालों से लोकतंत्र की शक्ति को जानने का अवसर मिला। मोदी के मुताबिक हर संकट उनके धैर्य की परीक्षा रहा, जबकि हर सफलता ने उनके दायित्व को और बढ़ाया।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘हम करके रहेंगे’ और ‘वी विल डू इट’ का संदेश दोहराया।

मोदी ने कहा कि 2047 में भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करना होगा। उन्होंने अपने लिए भी अधिक ऊर्जा और सामर्थ्य के साथ देशवासियों की सेवा करने की प्रार्थना करने की बात कही।

जनता के भरोसे को बताया सबसे बड़ी ताकत

प्रधानमंत्री ने कहा कि जनता ने उन्हें अलग-अलग चुनावों में सेवा का अवसर दिया और वह भारत के लोकतंत्र तथा संविधान के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। उन्होंने देशवासियों के विश्वास और भाजपा के कार्यकर्ताओं के परिश्रम को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया।

मोदी ने अपने वडनगर के स्कूल के दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि बचपन से ही सीखने की इच्छा उनके जीवन का हिस्सा रही है और आज भी वह स्वयं को विद्यार्थी मानते हैं। उनके अनुसार, 25 वर्षों की यह यात्रा उनके लिए अनुभव और सीख की ऐसी पूंजी है, जिसे वह देश की पूंजी मानते हैं।

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