सागर के बंडा में बदहाल श्मशान घाट, बारिश में खुले आसमान के नीचे करना पड़ रहा अंतिम संस्कार

बंडा। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन सागर जिले के बंडा क्षेत्र के दो गांवों की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां बारिश के मौसम में ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। श्मशान घाट होने के बावजूद जरूरी सुविधाओं का अभाव है।

कुल्ल गांव में श्मशान घाट पर नहीं है टीन शेड

जनपद पंचायत बंडा के ग्राम कुल्ल में करीब 2 हजार की आबादी है। गांव में श्मशान घाट तो मौजूद है, लेकिन वहां दाह संस्कार के लिए टीन शेड, बैठने की जगह और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बारिश के दौरान अंतिम संस्कार करने वाले परिवारों और ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पंचायत सचिव के अनुसार श्मशान घाट में आवश्यक सुविधाएं विकसित करने से संबंधित प्रस्ताव जनपद पंचायत को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

रमपुरा में श्मशान की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप

ग्राम पंचायत सेसई साजी के रमपुरा गांव में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान घाट के लिए आरक्षित शासकीय जमीन के कुछ हिस्से पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। इसके कारण अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती और ग्रामीणों को परेशानी होती है।

सरपंच प्रतिनिधि रामपाल सिंह लोधी का कहना है कि अतिक्रमण हटाने और समस्या के समाधान के लिए पंचायत की ओर से कई बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में कई शासकीय जमीनों पर कब्जे के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग

कुल्ल और रमपुरा के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी यदि बारिश में परेशान होना पड़े तो यह गंभीर समस्या है। उन्होंने श्मशान घाटों में पक्का निर्माण, टीन शेड, पेयजल और बैठने की व्यवस्था के साथ पहुंच मार्ग बनाने तथा रमपुरा में कथित अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

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