चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होने से महज 48 घंटे पहले हुई। गुरुवार को दिनभर चली अटकलों के बाद चीन ने आधिकारिक तौर पर बताया कि शी जिनपिंग नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट में हिस्सा लेंगे। करीब सात साल बाद शी जिनपिंग की यह भारत यात्रा होगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चीन ने इतने महत्वपूर्ण दौरे को अंतिम समय तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया।
चीन की कूटनीति में आखिरी वक्त तक जानकारी रोकना रणनीति
डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के मुताबिक, इस देरी को केवल प्रशासनिक या यात्रा से जुड़ी अनिश्चितता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। चीन की कूटनीति में महत्वपूर्ण फैसलों और यात्राओं को लेकर आखिरी समय तक जानकारी सीमित रखना एक पुरानी रणनीति रही है। बीजिंग अपने पत्ते पूरी तरह खोलने से बचता है और परिस्थितियों के अनुसार अपने लिए विकल्प खुले रखता है।
उनके अनुसार, शी जिनपिंग का दौरा भारत-चीन संबंधों की जटिलता को देखते हुए बेहद संवेदनशील है। दोनों देश एक-दूसरे के साथ सावधानी से आगे बढ़ते हैं। ऐसे में यात्रा को अंतिम समय तक गोपनीय रखने से चीन को बातचीत और कूटनीतिक परिस्थितियों को अपने हिसाब से संभालने की गुंजाइश मिलती है।
साइडलाइन बैठक और द्विपक्षीय मुद्दों पर बढ़त की कोशिश
शी जिनपिंग के दौरे की सार्वजनिक पुष्टि देर से किए जाने का एक संभावित कारण भारत के साथ होने वाली साइडलाइन बातचीत को भी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि चीनी राजनयिकों को शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली घोषणापत्र से जुड़े मसौदे और चर्चाओं के दौरान अधिक लचीलापन मिल सकता था।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस देरी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित अहम मुलाकात का दायरा और बातचीत के मुद्दे तय करने में बीजिंग को कुछ रणनीतिक बढ़त मिली होगी। हालांकि, भारत द्वारा किसी दबाव वाली शर्त को स्वीकार किए जाने की संभावना कम मानी जा रही है।
दौरे की आधिकारिक घोषणा को रोककर चीन यह भी सुनिश्चित कर सकता था कि ब्रिक्स की बहुपक्षीय चर्चा मुख्य रूप से आर्थिक और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहे और किसी अप्रत्याशित द्विपक्षीय तनाव से शिखर सम्मेलन का एजेंडा प्रभावित न हो।
सुरक्षा प्रोटोकॉल से लेकर ग्लोबल साउथ तक चीन का संदेश
चीन आमतौर पर अपने राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं की जानकारी पश्चिमी देशों की तरह महीनों पहले सार्वजनिक नहीं करता। चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से शी जिनपिंग की विदेश यात्राओं का कार्यक्रम अक्सर यात्रा से कुछ दिन पहले ही सामने आता है। इसके पीछे सुरक्षा, एयरस्पेस, लॉजिस्टिक्स और अन्य प्रोटोकॉल की तैयारियां भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
इसके अलावा चीन के व्यापक कूटनीतिक कैलेंडर को भी इस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। आखिरी समय तक घोषणा रोकने से बीजिंग को दूसरे वैश्विक मंचों पर अपने रुख को लेकर विकल्प बनाए रखने में मदद मिलती है और वह किसी एक मंच पर जल्दबाजी में कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता करने से बच सकता है।
वहीं, 11 सदस्यीय विस्तारित ब्रिक्स में पश्चिमी एशिया और अफ्रीका की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की भागीदारी के बीच शी जिनपिंग की मौजूदगी चीन के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का भी अवसर है। रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य आमंत्रित नेताओं के साथ मंच साझा करके चीन नई दिल्ली में होने वाले बहुपक्षीय सम्मेलन में अपनी भूमिका को मजबूत संदेश के तौर पर पेश कर सकता है।