सागर नकली शराब कांड पर सरकार का बड़ा एक्शन, 3 अधिकारी सस्पेंड; जीतू पटवारी बोले- प्रशासन की विफलता

भोपाल/सागर। सागर जिले की बंडा तहसील के तीन गांवों में नकली शराब पीने से मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। सीएम के निर्देश के बाद आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया, जबकि एक वरिष्ठ अधिकारी को जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

तीन गांवों में मौतों के बाद प्रशासन में हड़कंप

यह मामला बंडा तहसील के गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन गांवों से सामने आया है। नकली शराब पीने के बाद कुछ लोगों की मौत की सूचना से प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की आबकारी उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती को निलंबित किया गया है। वहीं उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को सागर जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है।

सीएम ने कहा- दोषियों को किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे

घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभारी मंत्री और अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सीएम ने प्रभावित क्षेत्रों में जांच के साथ-साथ पीड़ितों के लिए राहत और उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समेत वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित इलाकों में पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों के उपचार तथा चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

जीतू पटवारी ने सरकार पर साधा निशाना

मामले को लेकर कांग्रेस ने भी प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नकली शराब से हुई मौतों को लेकर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने इस घटना को सरकार और प्रशासन की विफलता बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि यदि प्रशासन और आबकारी विभाग ने समय रहते प्रभावी निगरानी की होती तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। वहीं सरकार की ओर से मामले में जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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